बुरहानपुर। खंडवा लोकसभा क्षेत्र से सांसद ज्ञानेश्वर पाटील ने बुधवार को नई दिल्ली में केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात कर नेपानगर क्षेत्र से जुड़ा एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया। सांसद ने केंद्रीय मंत्री को पत्र सौंपते हुए नेपानगर की 1665 एकड़ वनभूमि को राजस्व भूमि में परिवर्तित करने का अनुरोध किया।
सांसद का कहना है कि यह क्षेत्र आदिवासी बहुल है और वर्तमान में वनभूमि होने के कारण यहां के निवासियों को केंद्र और राज्य सरकार की कई जनकल्याणकारी योजनाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है।
बुनियादी सुविधाओं और योजनाओं के लाभ का रास्ता खुलेगा
मुलाकात के दौरान सांसद पाटील ने बताया कि यदि 1665 एकड़ भूमि को राजस्व श्रेणी में लाया जाता है, तो इससे क्षेत्र में सड़क, आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं का विस्तार संभव होगा। साथ ही आदिवासी समाज तक सरकारी योजनाओं की पहुंच भी आसान हो जाएगी।
केंद्रीय वन मंत्री भूपेंद्र यादव ने इस मांग पर सकारात्मक रुख दिखाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार जनहित के मुद्दों पर संवेदनशीलता से विचार करती है और इस विषय में नियमों के अनुरूप उचित निर्णय लिया जाएगा।
नेपा लिमिटेड से जुड़ा है भूमि का इतिहास
सांसद ने केंद्रीय मंत्री को अवगत कराया कि नेपा लिमिटेड, जो एशिया की पहली अखबारी कागज मिल मानी जाती है, को भारत सरकार द्वारा वर्ष 1949 में कुल 1762 एकड़ वनभूमि आवंटित की गई थी।
- इसमें से 107 एकड़ भूमि पर कागज कारखाना स्थापित है
- शेष 1665 एकड़ भूमि पर कर्मचारियों के आवास निर्मित हैं
वर्तमान में यह भूमि वनभूमि श्रेणी में होने के कारण वहां रहने वाले लोगों को कई सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
उद्योग और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
सांसद पाटील ने कहा कि यदि यह भूमि राजस्व भूमि में परिवर्तित होती है, तो इससे नए उद्योगों की स्थापना का मार्ग प्रशस्त होगा और स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिल सकेंगे। इससे क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास को गति मिलेगी।
उन्होंने यह भी बताया कि नेपा मिल के सेवानिवृत्त कर्मचारी संगठन और स्थानीय नागरिक लंबे समय से इस भूमि के हस्तांतरण की मांग कर रहे हैं। हाल ही में सांसद के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय उद्योग मंत्री एचडी कुमारस्वामी से भी मुलाकात कर यह मुद्दा उठाया था।

