कोविशील्ड पर ICMR के पूर्व वैज्ञानिक की बड़ी बात, लोगों को वैक्सीन से कोई ज्यादा खतरा नहीं

नई दिल्ली: अभी कोरोना वैक्सीन कोविशील्ड को लेकर ताजा खबर आई है, जिसमें कहा गया था कि इसे लगवाने को टीटीएस (TTS) का खतरा है। हालांकि इसी बीच आईसीएमआर के पूर्व वैज्ञानिक ने इसपर राहत खबर दी। उन्होंने कहा कि लोगों को ज्यादा डरने की जरूरत नहीं है।

इस वैक्सीन से साइड इफेक्ट दुर्लभ से दुर्लभ मामलों में होता है। इसके साथ ही उन्होंने डेटा को समझाते हुए कहा कि वैक्सीन लेने वाले 10 लाख लोगों में से 7 या 8 लोगों को हार्ट अटैक या ब्लड क्लॉटिंग यानी खून के थक्के जमने का जोखिम हो सकता है।

बता दें कि इन साइड इफेक्ट्स थ्रोम्बोसिस थ्रोम्बोसाइटोपेनिया सिंड्रोम (TTS) है। ICMR के पूर्व वैज्ञानिक डॉ. रमन गंगाखेडकर का कहना है कि इस वैक्सीन को लगवाने से किसी भी तरह का रिस्क नहीं है। यह दुर्लभ से दुर्लभ मामलों में होता है। हाल ही में उन्होंने एक मिडिया चैनल से बातचीत की, जिसमें उन्होंने कहा कि पहली डोज लेने से ज्यादा रिस्क होता है और दूसरी डोज लेने से रिस्क कम हो जाता है। इसके बाद तीसरी लगवाने से रिस्क एकदम कम हो जाता है। अगर साइड इफेक्ट होना होता तो शुरूआती दो से तीन महीनों में असर दिखने लगता।

उन्होंने कहा कि, वैक्सीन लेने के सालों बाद इससे डरने की जरूरत नहीं है। दरअसल मामला ब्रिटेन से आया था, जहां कुछ मृतकों के परिवार वालों ने कहा कि वैक्सीन लेने के बाद उनकी मौत हो गई। इसके बाद अदालत में केस शुरू हो गया है। जब केस आगे चला तो कोविशील्ड बनाने वाली कंपनी एस्ट्राजेनेका ने खुद माना कि दुर्लभ मामलों में ब्लड क्लॉटिंग की समस्या हो सकती है।

इस वैक्सीन को सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया ने बनाया है और इसका नाम कोविशील्ड ही है। बता दें कि भारत में लगभग 90 फीसदी लोगों को कोविशील्ड वैक्सीन ही लगी है। इसके बाद केस की खबर मीडिया में फ़ैल गई तो भारत में लोगों के बीच डर फ़ैल गया। इसके बाद ICMR के पूर्व वैज्ञानिक से पूछा गया तो केस को ख़ारिज कर दिया गया। उनका कहना है कि किसी भी वैक्सीन से कुछ साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं, लेकिन समय के साथ खत्म हो जाते हैं।

ICMR के पूर्व वैज्ञानिक डॉ. रमन गंगाखेडकर का कहना है कि किसी भी वैक्सीन के साथ ऐसा हो सकता है। पर उन्होंने कहा कि करीब 10 लाख में से 7 या 8 लोगों को साइड इफेक्ट का खतरा हो सकता है।