जानिए आ​खिर क्यों भाजपा ने मध्य प्रदेश के सीएम डॉ. मोहन यादव को भेजा आजमगढ

देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में भाजपा के लिए 370 लोकसभा सीटें एवं एनडीए गठबंधन के लिए 400 पार का लक्ष्य निर्धारित कर दिया है। लक्ष्य को हासिल करने के लिए भारतीय जनता पार्टी का ​थिंक टैंक जुट गया है। इसके लिए क्षेत्रीय पार्टीयों से सामंजस्य बैठाने के साथ अन्य दलों से आने वाले नेताओं के लिए दरवाजे खोल दिए हैं।

भारतीय जनता पार्टी उत्तर प्रदेश की सभी 80 लोकसभा सीटों को जीतने की बात कर रही है। इसके लिए जातिगत समीकरण सांधने में जुट गई है। उत्तर प्रदेश में यादवों की बात करें तो लगभग 8 से 10 फीसदी मतदाता है। वहीं 50 विधानसभा सीट ऐसी हैं जहां यादव या तो निर्णायक भूमिका में हैं या फिर उनका सीधा दखल है।

ऐसे ही एक लोकसभा सीट है आजमगढ़। आजमगढ़ को यादव बाहुल्य सीट माना जाता है। जहां विधानसभा की 10 सीटें हैं। जिन पर भारतीय जनता पार्टी की नजर है। लेकिन कामयाबी नहीं मिल पा रही है। पिछले चुनावों की बात करें तो 2017 एवं 2022 में हुए विधानसभा चुनावों में भाजपा को कोई सीट नहीं मिल सकी थी।

वहीं 2019 में हुए लोकसभा चुनाव में भी सपा प्रमुख अ​​खिलेश यादव ने भाजपा के दिनेश लाल निरहुआ को हरा दिया था। वो अलग बात है कि अ​खिलेश यादव के विधानसभा जाने पर रिक्त हुई सीट पर धर्मेंद्र यादव को हराकर दिनेश लाल निरहुआ सांसद बने थे। तभी से वहीं आजमगढ़ के सांसद है। आपको बता दें आजमगढ़ में लोकसभा के लिए अभी तक 20 बार चुनाव हुए हैं जिनमें से 14 बार यादव को जीत हासिल हुई है।

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यादव एवं सपा बाहुल्य इलाके को देखते हुए ही भारतीय जनता पार्टी ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को मैदान में उतार दिया है। मध्य प्रदेश के साथ ही उत्तर प्रदेश के यादवों को भाजपा के साथ लाने की जिम्मेदारी उनको दी गई है। जिसके तहत ही उन्होंने आजमगढ़ क्लस्टर का दौरा किया था। भाजपा कार्यकर्ता एवं पदा​धिकारियों से मिलते हुए उन्होंने पीएम की तारीफ करने के साथ आजमगढ से पुराना रिश्ता होने की बात कही थी।

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