एक विधानसभा में दो दिन से ज्यादा प्रचार नहीं कर पाएंगे लोकसभा प्रत्याशी, वजह जानना आपके लिए आवश्यक

एलोकसभा चुनाव कराने के लिए चुनाव आयोग ने तारीखों का ऐलान कर दिया है। तारीखाें का ऐलान होने के बाद पूरे देश में आदर्श आचार संहिता भी लागू हो गई हैं। चुनाव आयोग भी पूरे फार्म में दिख रहा है। यूपी के गृह सचिव, बंगाल के डीजीपी के साथ अन्य राज्यों के गृह सचिवों को हटा दिया है। वहीं तीन वर्ष से एक ही जगह जमे अ​​धिकारियों को तत्काल हटाने का आदेश भी दिया गया है। वहीं राजनैतिक पार्टियां भी अपने स्तर पर तैयारियों में जुट गई हैं।

मध्य प्रदेश में भी पूरे देश के साथ लोकसभा चुनाव होने हैं। पहले चरण का मतदान 19 अप्रेल को होगा। 19 अप्रेल को शहडौल, जबलपुर, बालाघाट, सीधी, मंडला, छिंदवाडा में मतदान होगा। मतदान प्रक्रिया के दौरान 30 मार्च को नाम वापिसी का दिन है। उसके बाद ही सही मायने में प्रत्याशी तय होते हैं। चुनाव प्रचार भी जोर पकडता है। वहीं दो दिन पूर्व चुनाव प्रचार थम जाता है। इस ​हिसाब से देखा जाए तो प्रचार के लिए 18 दिन ही मिलेंगे।

शहडौल, जबलपुर, बालाघाट में अभी तक कांग्रेस ने अपना कोई प्रत्याशी नहीं दिया है। कांग्रेस के कार्यकर्ताओं एवं टिकट मांगने वालों में बैचेनी है। कहा जा रहा है कि मंगलवार की सायं तक टिकट वितरण पर फैसला जाएगा। तीनों विधानसभाओं में 7 से आठ विधानसभाएं हैं। इस हिसाब से देंखे तो चाहे भाजपा हो या फिर कांग्रेस प्रत्याशी को तीन दिन से कम समय प्रचार के लिए मिलेगा। इसी में प्रत्या​शियों को बडी सभाएं भी करानी होगी।

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पहले चरण में छिंदवाडा सीट हॉट सीट बनी हुई है। कांग्रेस की परंपरागत सीट को पाने के लिए भाजपा पूरा जोर लगा रही है। 2019 में लोकसभा चुनाव के दौरान यही एक ऐसी सीट थी जिसे कांग्रेस ने भाजपा को 37536 मतों से हराकर जीता था। कांग्रेस भी सीट को जीतने के लिए आश्वसत है। वहीं परिणाम को जानने के लिए पहले चरण के उम्मीदवारों को बार 2 माह 18 दिन का इंतजार करना होगा जबकि 2019 में 2 माह 13 दिन का इंतजार करना पडा था।

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