सरकार की FASTag को GPS Tolling System से बदलने तैयारी पूरी, जानें क्या है पूरा सिस्टम?

नई-दिल्ली। वर्तमान में सड़कों पर सफर करने वाहन चालकों से टोल टैक्स वसूल किया जाता है। इसके लिए सरकार द्वारा FasTag की सुविधा प्रदान की गई है। वाहन चालक या वाहन के मालिक FasTag के माध्यम से पैसा कटवाकर अपना सफर पूरा करते हैं।

लेकिन इसमें भी कभी कभी काफी परेशानी होती है। कभी FasTag स्कैन नहीं होता तो कभी वाहन स्वामी रिचार्ज करना भूल जाते हैं। कभी कभी नेटवर्किंग की समस्या होती है। उसके बाद वाहन चालक या वाहन मालिक को दोगुना पैसा भरना होता है। पूर्व में टोल टैक्स के टोल बूथों पर लंबी-लंबी लाइन लगती थी।

कारण था कि टोल टैक्स के में नगद भुगतान किया जाता था। नगद भुगतान के कारण आए दिन टोल बूथों पर विवाद के मामले भी सामने आते थे। इन्हीं को रोकने के लिए सरकार द्वारा टोल टैक्स की वसूली के लिए FasTag सुविधा का प्रयोग किया गया था। FasTag आने के बाद से टोल वसूली के मामले में क्रांति आई है।

टोल टैक्स की वसूली काफी बढ़ी है तो विवाद भी काफी कम हो गए है। टोल बूथों को बनाने और वहां मौजूद मैनपावर को कम करने का खर्च करने का सरकार प्लान बना रही है। केंद्रीय सड़क मंत्री नितिन गडकरी ने 2023 में इसके संकेत दिए थे।

नितिन गडकरी ने कहा था कि सरकार सेटेलाइट बेस्ड सिस्टम को लाने पर विचार कर रही है। अब सरकार का कहना है सेटेलाइट आधारित टोलिंग सिस्टम मार्च 2024 से लागू हो जाएगा। सेटेलाइट बेस्ड टोलिंग सिस्टम वाहन चालकों और सरकार दोनों के लिए फायदेमंद साबित होगा।

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सरकार मार्गों पर GPS सिस्टम लगाएगी, जिससे वाहनों की निगरानी की जाएगी। टोल रोड पर आते ही वाहन चालक या फिर वाहन स्वामी के बैंक खाते से पैसा कट जायेंगे। GPS द्वारा निगरानी का फायदा होगा कि आप जितना सफर करेंगे उतना ही आपको भुगतान करना होगा।

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