Punyatithi: एक ऐसा मराठा शासन जिसने दलितों को पहली बार दिया था आरक्षण, रखी थी सामाजिक लोकतंत्र की नींव

वर्तमान में चारों तरफ आरक्षण की बात हो रही है। हर कोई एक दूसरे पर आरक्षण को खत्म करने का आरोप लगा रहा है। खुद प्रधानमंत्री एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत को भी बयान देना पडा। विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी पर संविधान को खत्म कर आरक्षण को समाप्त करने का आरोप लगा रहे हैं। वहीं भारतीय जनता पार्टी कांग्रेस एवं विपक्षी दलों पर दलित और ओबीसी के आरक्षण को मु​स्लिमों को देने का आरोप लगा रही है।

इन्हीं आरोपों के बीच आज हम आपको एक ऐसी खबर आपको बताने जा रहे हैं ​जिसके बारे में शायद आपको मालूम हो। आपको बता दें कि आज छत्रपति ​शिवाजी महाराज के वंशज शाहूजी महाराज की पुण्यति​थि। शाहूजी महाराज को सामाजिक लोकतंत्र की स्थापना करने वाला माना जाता है। उन्होंने कहा था कि सामाजिक ताना बाना बनाए रखने के लिए जातिवादी मानसिकता को समाप्त करना आवश्यक है। इसके लिए उन्होंने हरसंभव प्रयास किए।

छत्रपति ​शिवाजी महाराज के वंशज शाहूजी महाराज को सामाजिक लोकतंत्र की नींव रखने वाला माना जाता है। उन्होंने जातिवादी परंपराओं को तोड दिया था। उन्होंने जातिवादी परंपरा को तोडते हुए उन्होंने एक दलित की दुकान पर चाय पी थी। वहीं 1902 में उन्होंने एक ऐसा ऐलान कर दिया ​था कि उस समय तूफान आ गया। अ​धिकांश लोगों ने इसका विरोध किया था लेकिन वो अपने फैसले पर अडिग रहे।

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1902 में शाहूजी महाराज ने सरकारी नौकरियों में आरक्षण की घोषणा की थी। उन्होंने अपने राज्य क्षेत्र में निवास करने वाले ओबीसी वर्ग के नागरिकों को 50 प्रतिशत आरक्षण देने का ऐलान किया था। इस पहल को भारत में किसी राजा या राज्य के द्वारा दलित एवं ओबीसी समाज को प्रथम बार आरक्षण देना माना जाता है।

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