कृषि की इस नई तकनीक से सूखे और बंजर खेत हो जाएंगे आबाद, लहलहाने लगेगी फसल, जानें तकनीक के बारें में

New Agricultural Technology: अगर आप किसान हैं तो यह खबर आपके लिए बेहद अहम होने वाली है। जी हां आपने सही सुना। दरअसल किसानों को कहा गया है कि जल संवर्धन से निपटने के लिए उसके उपायों को समझना जरूरी है, जिससे कि उन्हें सूखे का सामना न करना पड़े।

इसके आलावा किसानों को समझना चाहिए मौसम के अनुसार किस फसल करना चाहिए, जिससे कि उनकी उपज बढ़े। आज के समय तकनीक के कारण सही समय पर मौसम की जानकारी मिल जाती है, लेकिन समस्या यह है कि किसानों तक सरल तरीके से इसकी जानकारी कैसे पहुंचाई जाए।

बता दें कि ये सभी बातें एनडीएमए के सदस्य कृष्ण एस वत्स ने सोमवार को आईजीपी में राहत विभाग की ओर से आयोजित ”आधुनिक तकनीकों के माध्यम से सूखा न्यूनीकरण” विषय पर एक दिवसीय सम्मेलन में बोली। इस सम्मेलन में कई और विशेषज्ञ ने हिस्सा लिया था, जिन्होंने चर्चा कि कैसे तकनीकी के जरिए प्रदेश सूखा नियंत्रण हो सके।

New Agricultural Technology के अलग-अलग मुद्दों पर हुई चर्चा

इस सम्मलेन को 3 सत्रों में बांटा गया था, जिसमें विशेषज्ञों ने अलग-अलग चर्चा की। पहले सत्र में टेक्नोलॉजी फॉर ड्रॉट मॉनीटरिंग विषय पर चर्चा की गई। इसमें विशेषज्ञों ने अपने अलग-अलग विचार दिए। दूसरे सत्र में टेक्नोलॉजी फॉर ड्रॉट मिटीगेशन विषय पर चर्चा हुई।

इसमें कैसे New Agricultural Technology के जरिए सूखे पर नियंत्रण पाया जा सकता है। वहीं तीसरे सत्र में टेक्नोलॉजी फॉर ड्रॉट मैनेजमेंट विषय चर्चा हुई, जिसमें विशेषज्ञों ने अलग-अलग पहुलओं पर चर्चा की। इसके साथ उन्होंने अपने विचार रखें।

स्वच्छ फार्मिंग और स्मार्ट एग्रीकल्चर पर गौर किया जाए

सम्मेलन में आए आईसीएआर-सीएएफआरआई झांसी के डॉ. आशाराम ने कहा कि आज के समय बदलते परिवेश के कारण किसानों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि हम सब तकनीक का इस्तेमाल करके किसानों की मदद कर सकते हैं।

ऐसे में हमें स्वच्छ फार्मिंग और स्मार्ट एग्रीकल्चर पर गौर करना होगा। इससे किसानों को बड़ा फायदा तो होगा ही, साथ ही सूखा होने पर उन्हें समय रहते हुए मदद मिलेगी। उन्होंने आगे कहा कि किसानों को खेती बढ़ाने के लिए अलग-अलग प्रयोग करने की जरूरत है।

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जैसे कि उन्हें बंबू प्लांटिंग मैटेरियल यानी बांस की खेती करनी चाहिए। इसके आलावा किसानों को कुछ अलग करने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए। इससे किसानों को ज्यादा फायदा पहुंचे और प्रकृति को भी नुकसान ना हो।

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